UP Elections: In UP BJP Is Contesting Elections Under The Leadership Of Yogi Adityanath Or Under The Leadership Of Party Symbol Ann


UP Elections: क्या यूपी बीजेपी में सब ठीक ठाक है ? डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) के ताज़ा बयान से इस सवाल पर बहस तेज हो गई है. हाथरस में पार्टी के कार्यक्रम में मौर्य ने कहा कि यूपी में चुनाव कमल के फूल के नेतृत्व में लड़ा जाएगा. जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लखनऊ में कहा था कि 2022 में योगी (Yogi Adityanath) की जीत ही मोदी की जीत है.बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह के इस एलान से तो नेतृत्व के सवाल पर फ़ुलस्टॉप लग गया था. यूपी चुनाव में बीजेपी का सीएम चेहरा कौन ? इस सवाल को लेकर पिछले कुछ महीनों से ससपेंस बना था. क्या यूपी में असम की तरह प्रयोग तो नहीं होने वाला है? जहां सर्वांनद सोनोवाल की सरकार थी, लेकिन नतीजे आने के बाद हिमंता बिस्वा सरमा मुख्यमंत्री बना दिए गए. शाह ने लखनऊ में इस सस्पेंस पर विराम लगा दिया. जब उन्होंने योगी को फिर से मुख्यमंत्री बनाने की अपील की, तब मंच पर उनके बग़ल में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी थे, लेकिन तीन दिनों बाद ही केशव प्रसाद मौर्य ने कन्फ़्यूज़न और टेंशन दोनों बढ़ा दिया. हाथरस में जब एक पत्रकार ने मौर्य से सवाल पूछा कि यूपी में बीजेपी किसके नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है तो उन्होंने जवाब दिया कि बीजेपी कमल फूल के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है.केशव प्रसाद मौर्य ने जब नेतृत्व को लेकर ये बयान दिया तब यूपी बीजेपी के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह भी हाथरस में थे. तीन महीने पहले भी जब सीएम चेहरे को लेकर विवाद जारी था, तब सीएम योगी आदित्यनाथ की तरफ से स्वतंत्र देव सिंह ही मोर्चा संभालते थे. वे लगातार कहते रहे कि यूपी में योगी जी की सरकार है जो देश में सबसे अच्छा काम कर रही है और वही यूपी के अगले सीएम बनेंगे.ये वो दौर था जब बीजेपी में दिल्ली और लखनऊ के बीच बढ़ती दूरियों की खबरें सुनी और सुनाई जाती थीं. इस बात को हवा तब मिला जब डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहना शुरू किया था कि मुख्यमंत्री का फ़ैसला तो चुने हुए विधायक करते हैं. मौर्य हर बार नेता चुने जाने की बीजेपी की परंपरा का हवाला देते रहे, जिसमें पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक नए विधायकों की सहमति से विधायक दल का नेता चुनते हैं.यूपी की राजनीति में सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बीच दूरियां शुरू से रही हैं. ये बात पिछले चुनाव की है, जब केशव प्रसाद मौर्य यूपी बीजेपी के अध्यक्ष थे. योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से सांसद थे. सीएम की रेस में दोनों थे, लेकिन बाज़ी मार ली भगवाधारी योगी ने. पिछड़ों की राजनीति करने वाले मौर्य को डिप्टी सीएम से ही संतोष करना पड़ा. तब से ही दोनों के अनबन की खबरें छन छन कर आती रही हैं. लखनऊ में दोनों का सरकारी घर अगल बगल में है. लेकिन योगी पहली बार केशव के घर इसी साल जून महीने में गए. वे भी केशव के बेटे की शादी के बहाने वर वधू को आशीर्वाद देने.केशव प्रसाद मौर्य ने अपने घर पर योगी आदित्यनाथ का मुंह भी मीठा कराया, लेकिन सत्ता की कड़वाहट आज भी जस की तस बनी हुई है. अखिलेश यादव भी इसी रिश्ते को लेकर बीजेपी की दुखती रग दबाते रहते हैं. कहा जाता है कि यूपी बीजेपी दो गुटों में बंटी है. एक गुट में सीएम योगी आदित्यनाथ और यूपी बीजेपी के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह हैं, तो दूसरे ख़ेमे में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और यूपी बीजेपी के संगठन महामंत्री सुनील बंसल हैं.Indian Railways ने इन सभी ट्रेनों का बदल दिया टाइम टेबल, आपने भी कराया है टिकट तो फटाफट चेक करें नया टाइमDelhi Schools Reopen: दिल्ली में कल से खुलेंगे स्कूल, बच्चों को स्कूल भेजने से पहले इन 5 बातों का जरूर रखे ध्यान



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