Minority Scholarship Scam Center Modi Government Gave CBI For Investigation ANN


Scholarship Scam: केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक मंत्रालय की जांच में स्कॉलरशिप स्कीम में घोटाला सामने आया है. जांच में पता चला है कि फर्जी मदरसों और फर्जी छात्रों के नाम पर करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति बैंक खाते के जरिए निकाल ली गई.
मामले की जानकारी मिलते ही अल्पसंख्यक मंत्रालय ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी है. शुरुआती जांच में सामने आया कि देश के 1572 संस्थानों में करीब 830 संस्थान सिर्फ कागजों में पाए गए. इनमें पिछले 5 सालों में 144.83 करोड़ की स्कॉलरशिप का घोटाला किया गया. वहीं देश में करीब 1 लाख 80 हजार अल्पसंख्यक संस्थान है.  
अल्पसंख्यक मंत्रालय ने क्या कहा?अल्पसंख्यक मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि करीब 53 फीसदी संस्थान फेक या नॉन ऑपरेटिव निकले. इसके लिए मंत्रालय ने नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) से करवाई गई थी.
सरकार ने 830 फर्जी संस्थानों का बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए हैं. सूत्रो की मानें तो मदरसों और अल्पसंख्यक संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों को ये स्कॉलरशिप दी जाती है. कई मामलों में पता चला कि एक मोबाइल नंबर पर 22 बच्चे रजिस्टर्ड थे. इसी तरह केरल के एक जिले मल्लपुरम में पिछले 4 साल में 8 लाख बच्चों को छात्रवृत्ति मिली. 
असम के नौगांव के एक बैंक शाखा में 66 हजार स्कॉलरशिप खाता एक ही बार में खोले गए. इसी तरह कश्मीर के अनंतनाग डिग्री कॉलेज का मामला सामने आया. कॉलेज में कुल 5000 छात्रों की संख्या है, लेकिन फर्जीवाड़ा कर 7000 छात्रों का स्कॉलरशिप लिया जा रहा है.
कैसे हुआ खुलासा?अल्पसंखयक मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, साल 2016 में जब पूरी स्कॉलरशिप प्रक्रिया को डिजिटलाइज किया गया तो घोटाले की परतें खुलना शुरू हुई. साल 2022 में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को जब अल्पसंख्यक मंत्रालय का प्रभार दिया गया तो इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बड़े लेवल पर जांच शुरू कराई गई. 
कब से ये चल रहा है?सूत्रों ने बताया कि ये  2007 से 2022 तक चला. केंद्र सरकार अब तक करीब 22000 करोड़ रुपये स्कॉलरशिप के रूप में जारी कर चुकी है. इसमें पिछले चार साल से हर साल 2239 करोड़ रुपये जारी किए गए हैंं
देश के 12 लाख बैंक की शाखाओं में हर ब्रांच में करीब 5000 से ज्यादा बच्चों को स्कॉलरशिप के पैसे जा रहे थे. देश में 1,75,000 मदरसे हैं. इनमें केवल 27000 मदरसे ही रजिस्टर्ड है. जो कि स्कॉलरशिप लेने के लिए पात्र है.
ये स्कॉलरशिप अल्पसंख्यक समुदाय के पहली क्लास से लेकर पीएचडी तक के छात्रों को दिया जाता है. इसके तहत 4000 से लेकर 25000 रुपये तक दिए जाते हैं. जांच में सामने आया कि 1.32 लाख बच्चे बिना हॉस्टल के रह रहे थे, लेकिन वह इसके नाम पर मिलने वाली छात्रवृत्ति ले रहे थे. 
स्कॉलरशिप की क्या प्रक्रिया है?अल्पसंख्यक मंत्रालय की जारी की जाने वाली स्कॉलरशिप भले ही केंद्र की ओर से दी जारी होती है, लेकिन उसका भौतिक सत्यापन और प्रक्रिया राज्य सरकार की मशीनरी पर निर्भर करता है. ऐसे में अल्पसंख्यक के जो भी संस्थान हैं वह राज्य के जिला इकाई में अल्पसंख्यक विभाग के दफ्तर में रजिस्टर्ड किए जाते हैं.
बच्चों की स्कॉलरशिप के अकाउंट लोकल बैंकों में खोले जाते हैं. वहीं जबकि संबंधित संस्थान में बच्चे हैं या नहीं. इसके अलावा संस्थान है या नहीं. इसका सत्यापन भी राज्य सरकार के अल्पसंख्यक मंत्रालय के विभागीय अधिकारी करते हैं. राज्य सरकार से अनुमोदित लिस्ट केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक मंत्रालय को दी जाती है. फिर यहां से स्कॉलरशिप डायरेक्ट बैंक खाते में भेज दी जाती है. 
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