Galwan Clash Martyr Soldier Deepak Singh Wife Rekha Singh Become Lieutenant In Indian Army And Joined Officers Training Academy ANN


Galwan Clash Martyr Soldier Wife Become Lieutenant: गलवान घाटी (Galwan Valley Clash) में वीरगति को प्राप्त हुए सैनिक, दीपक सिंह (Martyr Soldier Deepak Singh) की पत्नी ने सेना की परीक्षा पास कर ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए), चेन्नई ज्वाइन कर ली है. एक साल की प्री-कमिशनिंग ट्रेनिंग के बाद वे सेना में लेफ्टिनेंट (अधिकारी) के पद पर नियुक्त हो जाएंगी. रेखा सिंह (Rekha Singh) के पति गलवान घाटी की हिंसा में चीनी सेना से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे. सेना की मेडिकल कोर से ताल्लुक रखने वाले दीपक कुमार ने ना केवल घायल सैनिकों का इलाज किया बल्कि चीनी सैनिकों से लोहा भी लिया था. उनके अदम्य साहस और बहादुरी के लिए उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से नवाजा गया था.
वहीं रेखा सिंह के ओटीए चेन्नई में दाखिला लेने पर सेना की आर्मी ट्रेनिंग कमान (आरट्रैक) ने ट्वीट कर कहा कि “विपरीत परिस्थितियों पर विजय पाने और सम्मान, धैर्य और समर्पण के साथ आगे बढ़ने के लिए हम रेखा सिंह के प्रेरणादायक साहस और दृढ़ संकल्प को सलाम करते हैं.” पिछले साल यानि नबम्बर 2021 में रक्षा अलंकरण समारोह के दौरान राष्ट्रपति के हाथों रेखा सिंह ने अपने पति का मरणोपरांत वीर चक्र ग्रहण किया था. वे मध्य प्रदेश के रीवा से अपने ससुर और जेठ प्रकाश सिंह के साथ राजधानी दिल्ली पहुंची थी.
पति की शहादत पर गर्व, लेकिन साथ नहीं होने का गम भी
वीर चक्र लेने के बाद एबीपी न्यूज से खास बातचीत में रेखा सिंह ने कहा था कि उन्हें अपने पति, दीपक कुमार की बहादुरी पर गर्व तो जरूर है. लेकिन इस बात का गम भी है कि वे अब उनको साथ नहीं है. नायक दीपक सिंह के भाई प्रकाश सिंह भी सेना से रिटायर हुए हैं और अपने छोटे भाई की शहादत पर फक्र करते हुए कहा था कि छोटे भाई की वजह से आज पूरी दुनिया उन्हें जान गई है. नायक दीपक सिंह (Lance Naik Deepak Singh) आर्मी मेडिकल कोर (एएमसी) से ताल्लुक रखते थे और ऑपरेशन स्नो-लैपर्ड के दौरान 16 बिहार रेजीमेंट के साथ ‘अटैचड’ थे.
घायल होने के बावजूद किया था 30 सैनिकों का उपचार
सेना के प्रशस्ति-पत्र के मुताबिक, “नायक दीपक सिंह हालांकि आर्मी मेडिकल कोर (एएमसी) से ताल्लुक रखते थे और ऑपरेशन स्नो-लैपर्ड के दौरान 16 बिहार रेजीमेंट के साथ तैनात थे. 15 जून (2020) की रात को गलवान घाटी में चीनी सैनिकों से हुई झड़प में दीपक सिंह भी घायल हुए थे. लेकिन घायल होने के बावजूद उन्होनें करीब 30 सैनिकों का उपचार किया और फिर देश के लिए सर्वोच्च-बलिदान दे दिया. उनके इस अनुकरणीय साहस और कार्य के लिए वीर चक्र से नवाजा गया है.” वीर चक्र युद्ध के समय या फिर अशांति काल में दुश्मन के खिलाफ अनुकरणीय साहस के लिए दिया जाता है. वीर च्रक भी परमवीर चक्र और महावीर चक्र की तरह शांति काल में नहीं दिए जाते हैं.
गलवान घाटी में हुई थी चीनी सैनिकों से झड़प
गौरतलब है कि भारतीय सेना (Indian Army) ने पूर्वी लद्दाख (Ladakh) में एलएसी (LAC) पर चीनी सेना की आक्रामकता के खिलाफ दो साल पहले यानि मई 2020 में ऑपरेशन स्नो लेपर्ड (Operation Snow Leopard) शुरू किया था. उसी दौरान गलवान घाटी में हुई हिंसा (Galwan Valley Clash) के दौरान भारतीय सेना की बिहार रेजीमेंट के कमांडिंग ऑफिसर, कर्नल संतोष बाबू सहित 20 सैनिक वीरगति को प्राप्त हो गए थे. नायक दीपक सिंह भी इन 20 सैनिकों में शामिल थे. चीनी सेना को भी इस संघर्ष में बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था. हालांकि, चीन ने कभी हताहत हुए सैनिकों के आंकड़े का खुलासा नहीं किया था, लेकिन चीन ने भी पिछले साल अपने पांच सैनिकों को गलवान घाटी की हिंसा के लिए वीरता मेडल से सम्मानित किया था. इनमें से चार मरणोपरांत थे. 
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