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G20 Summit 2023: जी20 शिखर सम्मेलन में दुनिया की महाशक्तियां एक मंच पर दिखाई दी. भारत जी20 समिट के जरिए तमाम बड़े देशों को साथ लाया, जो भारत के लिए काफी अहम माना जा रहा है. इस सम्मेलन के नतीजों की खूब सराहना की जा रही है, लेकिन जी20 शिखर सम्मेलन से भारत को आखिर क्या हासिल हुआ. आइए इन पांच प्वॉइंट्स के जरिए आपको बताते हैं:-
1. ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंसप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी20 शिखर सम्मेलन के पहले दिन ही स्वच्छ ऊर्जा के मामले में भारत की ओर से एक महत्वपूर्ण पहल का ऐलान किया था. उन्होंने इस मौके पर ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस लॉन्च करने की घोषणा की थी. भारत के अलावा अमेरिका और ब्राजील इस नए अलायंस के फाउंडिंग मेंबर हैं. ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस के लॉन्च होने के बाद तीनों फाउंडिंग मेंबर्स समेत अर्जेंटीना और इटली जैसे कुल 11 देश इससे जुड़ चुके हैं.
2. जी20 अब जी21पीएम मोदी ने जी20 शिखर सम्मेलन के पहले दिन एक बड़ा एलान ये भी किया कि जी20 अब जी21 कहलाएगा. सर्वसम्मति के बाद अफ्रीकी यूनियन को जी20 का सदस्य बनाया गया है. इस नई सदस्‍यता को एक ऐतिहासिक कदम करार दिया जा रहा है जो कि भारत की अध्यक्षता में उठाया गया.
3. नई दिल्ली घोषणापत्रजी20 शिखर सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध पर प्रमुख मतभेदों से पार पाते हुए एक सर्वसम्मत घोषणापत्र को अपनाया गया. सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक विश्वास की कमी को खत्म करने का आह्वान किया. इतना ही नहीं 32 पन्नों वाले इस खास घोषणापत्र में सभी देशों की आम सहमति हासिल की गई है, जिसे भारत के लिए एक बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है.
4. सिल्क नहीं, स्पाइस रूटशिखर सम्मेलन में हुई एक बड़ी घोषणा में भारत से यूरोप तक ट्रेड रूट बनाने की संकल्पना को काफी खास माना जा रहा है. भारत से यूरोप तक जिस ट्रेड रूट को बनाने की संकल्पना पेश की गई है, वह पश्चिम एशिया से होकर गुजरेगा और तैयार हो जाने पर चीन के मॉडर्न सिल्क रूट की काट साबित होगा. इस ट्रेड रूट का ऐलान पूरी दुनिया के लिए काफी महत्वपूर्ण है. 
5. परमाणु हथियारों का इस्तेमाल या धमकी मंजूर नहींदिल्ली घोषणापत्र में यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए देश में व्यापक, न्यायसंगत और स्थायी शांति का आह्वान किया गया. इतना ही नहीं सदस्य देशों से इलाकों पर कब्जा करने के लिए ताकत के इस्तेमाल या किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ कार्य करने से बचने का आग्रह किया गया है. घोषणापत्र में कहा गया कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल या इस्तेमाल की धमकी अस्वीकार्य होनी चाहिए.
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